बिजली कंपनी से रिटायर हो रहे हैं पुराने और अनुभवी कर्मचारी,नई भर्ती भी अटकी
सीमित कर्मचारियों पर बढ़ा काम का दबाव, हर माह औसतन 200 कर्मचारी हो रहे सेवानिवृत्त
वितरण क्षेत्र और प्लांट संचालन पर पड़ रहा असर
कोरबा। बिजली कंपनी में कर्मचारियों और अधिकारियों की कमी बनी हुई है। वहीं हर माह औसतन करीब 200 अधिकारी और कर्मचारी सेवानिवृत्त हो रहे हैं। चूंकि सेवानिवृत्त होने वाले कर्मचारी पुराने और अनुभवी हैं, जिनकी कमी से कंपनी के कामकाज पर असर होने लगा है। सबसे ज्यादा असर वितरण क्षेत्र के मैदानी कार्य और बिजली प्लांटों के संचालन पर पड़ा है। प्रबंधन के स्थानीय अधिकारी भी मानते है कि कंपनी में अनुभवी कर्मचारियों की संख्या तेजी से घट रही है, लेकिन उसी अनुपात में नई भर्ती नहीं हो रही है।
भारतीय मजदूर संघ ने इसे गंभीर समस्या बताते हुए प्रबंधन से कंपनी में शीघ्र नई भर्ती की मांग की है। संगठन का कहना है कि रिक्त पदों की भरपाई न होने से कर्मचारी शारीरिक और मानसिक दबाव में काम कर रहे हैं। इसका असर समय-समय पर मशीनों के रखरखाव, मरम्मत में देरी और हादसों की आशंका के रूप में सामने आता है। वहीं आउटसोर्सिंग से काम कराए जाने पर उनकी निगरानी का अतिरिक्त दबाव भी अधिकारी व कर्मचारियों पर रहता है।
हाल ही में एचटीपीएस में नए प्रोजेक्ट के निर्माण को देखते हुए प्रबंधन ने लगभग 120 कर्मचारियों की भर्ती को स्वीकृति दी है, लेकिन वितरण क्षेत्र और पुराने संयंत्रों में अब भी अधिकारी व कर्मचारियों की कमी बनी हुई है।बताया जा रहा है पूरे बिजली कंपनी में करीब 25 हजार स्वीकृत पद हैं, जबकि कार्यरत केवल 15 हजार कर्मचारी हैं। नई भर्ती लंबे समय से रुकी है और संविदा कर्मचारियों को नियमित नहीं किया जा रहा है। तृतीय एवं चतुर्थ श्रेणी के कर्मचारियों के पदों की रिस्ट्रक्चरिंग नहीं होने से ऊपर के पद नहीं भरे जा रहे हैं और कर्मचारियों को प्रमोशन भी नहीं मिल रहा है।
बिजली प्लांटों में भी स्वीकृत पद के आधे से कम कर्मचारी
कोरबा पूर्व प्लांट का बंद होने के साथ बाद जिले में पावर कंपनी के दो प्लांट संचालित हैं, वहीं जांजगीर-चाम्पा में मड़वा प्लांट है। इन तीनों संयत्रों के लिए पांच हजार से अधिक पद स्वीकृत है। लेकिन यहां लगभग 2400 ही कर्मचारी कार्यरत हैं। इस तरह प्लांटों में स्वीकृत पद कार्यरत हैं।
स्वीकृति के बाद भी भर्ती अटकी
कर्मचारी संघ के मुताबिक जनरेशन कंपनी के लिए आईटीआई के 500 पदों पर भर्ती का मामला स्वीकृति के बाद भी पिछले एक साल से अटका है। कंपनी के फायर विभाग, विभागीय अस्पतालों के लिए फार्मासिस्ट व अन्य मेडिकल स्टाफ की भर्ती के लिए भी अनुमोदन हो चुका है, लेकिन नियुक्तियां अब तक शुरू नहीं हुई हैं।
आउटसोर्सिंग पर बढ़ती निर्भरता
कंपनी में अब अधिकांश कार्य आउटसोर्सिंग से कराए जा रहे हैं। संगठनों के अनुसार, नियमित और आउटसोर्सिंग कर्मचारियों का अनुपात 70 व 30 होना चाहिए, लेकिन वास्तविकता इसके उलट है। ट्रांसमिशन कंपनी में सुपरविजन स्टाफ को छोड़कर लगभग सारा काम आउटसोर्सिंग के भरोसे है। वितरण कंपनी में सब-स्टेशनों के संचालन से लेकर मैदानी स्तर पर रखरखाव और लाइन मेंटनेस का कार्य आउटसोर्सिंग से कराया जा रहा है। जनरेशन कंपनी में भी ठेका कर्मचारियों की संख्या लगातार बढ़ रही है।
शासन व प्रबंधन के समक्ष उठाया है मुद्दा-राधेश्याम जायसवाल
बीएमएस विद्युत क्षेत्र के राष्ट्रीय प्रभारी राधेश्याम जायसवाल ने बताया कि छत्तीसगढ़ बिजली कंपनी में लगभग स्वीकृत पद के लगभग 10 हजार पद रिक्त हैं। अधिकांश काम आउटसोर्सिंग और संविदा कर्मचारियों पर टिका है। प्रबंधन और शासन को पत्र लिखकर रिक्त पदों पर भर्ती की मांग की गई है। संगठन का कहना है कि नई भर्ती प्रक्रिया शुरू कर वर्षों से कंपनी में काम कर रहे ठेका और आउटसोर्सिंग कर्मचारियों को प्राथमिकता दी जानी चाहिए।
