खाट पर वृद्धा को लेकर पहुंचे दफ्तर फिर मेनगेट पर ताला जड़कर किया धरना प्रदर्शन
खदान प्रभावितों ने एसईसीएल कुसमुंडा मेनगेट साढ़े सात घंटे बंद रखा, कर्मचारियों को हुई परेशानी
जमीन के बदले नौकरी की मांग को लेकर आंदोलन
कोरबा। जमीन के बदले रोजगार की मांग को लेकर एसईसीएल कुसमुंडा खदान के प्रभावितों ने एक बार फिर प्रबंधन के खिलाफ मोर्चा खोल दिया है। सोमवार को खदान प्रभावित गांवों के कुछ लोग खाट पर एक वृद्धा को लेकर कुसमुंडा महाप्रबंधक कार्यालय पहुंचे और मेन गेट पर ताला जड़कर धरना प्रदर्शन शुरू कर दिया। इससे एसईसीएल कुसमुंडा प्रबंधन की मुश्किलें बढ़ गई।
सोमवार को सुबह करीब 9 बजे बरकुटा गांव की 80 वर्षीय वृद्धा सूरजबाई को उनके परिवार के लोग व कुछ अन्य ग्रामीण खाट पर लेटाकर एसईसीएल कुसमुंडा महाप्रबंधक कार्यालय पहुंचे । उन्होंने मेन गेट के सामने खाट रख दिया और धरना प्रदर्शन शुरू कर दिया। दफ्तर में कोई न जा सके इसके लिए गेट पर ताला लगा दिया। यहां आंदोलन करने वालों में बरकुटा की गोमती केंवट सहित अन्य गांव के खदान प्रभावित मीना कंवर, बसंती बिंझवार, सरिता मंझवार, सहरतीन मंझवार, टिकैत राम बिंझवार और रामकुंवर विंझवार सहित अन्य शामिल रहे। ग्रामीण सुबह नौ बजे ही कार्यालय पहुंच गए थे और गेटबंद कर धरना प्रदर्शन शुरू कर दिया। सुबह आफिस टाइम पर जब अधिकारी व कर्मचारी कार्यालय पहुंचे तो उन्हें ताला बंद होने के कारण भीतर जाने में दिक्कत हुई। गेटजाम आंदोलन को देखते हुए कुसमुंडा प्रबंधन के अधिकारी ग्रामीणों को समझाइश देने पहुंचे, वहीं आंदोलन की सूचना पर कुसमुंडा पुलिस भी मौके पर पहुंची। वृद्धा सुरजबाई के परिजनों का कहना है कि उनके पांच एकड़ की जमीन के बदले एक को ही नौकरी दी गई है। उनकी इस शिकायत पर प्रबंधन के अधिकारी जांच कराने की बात करते रहे, लेकिन ग्रामीण गेट पर ही अड़े रहे। यहां आंदोलन करने वाले अन्य ग्रामीणों का कहना है कि प्रबंधन उनकों कोर्ट जाने के लिए कह रहा है लेकिन ग्रामीणों का कहना है कि जब जमीन कुसमुंडा खदान के लिए ली गई तो उनकी समस्या का समाधान भी कुसमुंडा प्रबंधन को करना चाहिए। आंदोलन कर रहीं गोमती केंवट की शिकायत पर प्रबंधन की ओर से पूर्व में एसईसीएल भटगांव प्रबंधन को पत्र लिखा गया है। वहीं गोमती केंवट का कहना था कि अब आगे मामले में आगे कुछ नहीं हो रहा है। इधर गेट जाम आंदोलन के बाद प्रबंधन ने फिर उसे आश्वासन दिया है। गोमती केवट का कहना है कि प्रबंधन की ओर से उसके मामले में 72 घंटे में ठोस कार्यवाही का लिखित आश्वासन दिया गया है। इधर पुलिस व प्रबंधन के अधिकारियों की समझाइश के बाद शाम करीब 4.30 बजे भूविस्थापित मौके से हटे। हालांकि ग्रामीण फिर आंदोलन की चेतावनी देते हुए मौके से गए।
बार-बार आंदोलन,एसईसीएल कुसमुंडा प्रबंधन की बढ़ी मुश्किलें
कोयला उत्पादन लक्ष्य से पीछे चल रही एसईसीएल कुसमुंडा खदान प्रबंधन की मुश्किलें भूविस्थापितों ने फिर बढ़ा दी है। कुसमुंडा में आए दिन भू-विस्थापितों का नौकरी,मुआवजा व अन्य मांगों को लेकर विरोध प्रदर्शन देखने मिल रहा है। करीब डेढ़ माह पहले कुसमुंडा में महिलाओं ने कार्यालय के भीतर प्रदर्शन किया था। इसके दूसरे दिन कुसमुंडा में गेट जाम आंदोलन फिर किसान सभा ने कुसमुंडा में तालाबंदी आंदोलन किया था। अब फिर गेटजाम आंदोलन से प्रबंधन की परेशानी बढ गई है।
