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मानिकपुर खदान में कोयला डिस्पैच व्यवस्था का एसईसीएल के डीटी ने किया निरीक्षण

खदान में कोयला उत्पादन, ओवरबर्डन हटाने के कार्य, मशीनों के और खदान में चल रही गतिविधियों का निरीक्षण किया


कोरबा। एसईसीएल के निदेशक (तकनीकी), परियोजना एवं योजना रमेश चंद्र महापात्र ने कुसमुंडा मेगा परियोजना के निरीक्षण के बाद देर शाम को कोरबा क्षेत्र की प्रमुख खदान मानिकपुर पहुंचकर और कोयला उत्पादन और डिस्पैच व्यवस्था का जायजा लिया। इस दौरान उन्होंने मानिकपुर ओपन कास्ट खदान में कोल हैंडलिंग प्लांट (सीएचपी) और साइलो का निरीक्षण कर उत्पादन से लेकर कोयला डिस्पैच तक की पूरी व्यवस्था की समीक्षा की। मानिकपुर खदान में उन्होंने कोयला उत्पादन, ओवरबर्डन हटाने के कार्य, मशीनों के उपयोग और खदान में चल रही गतिविधियों का निरीक्षण किया। अधिकारियों से उत्पादन की प्रगति की जानकारी ली और उपलब्ध संसाधनों का बेहतर उपयोग कर उत्पादन और उत्पादकता बनाए रखने के निर्देश दिए। इसके बाद उन्होंने कोल हैंडलिंग प्लांट और साइलो पहुंचकर कोयले की हैंडलिंग और डिस्पैच व्यवस्था का जायजा लिया। इस दौरान फर्स्ट माइल कनेक्टिविटी (एफएमसी) परियोजना और रैपिड लोडिंग सिस्टम के जरिए कोयले की तेज और निर्बाध कोयला डिस्पैच को लेकर पर विशेष रूप से चर्चा की गई और कार्यक्षमता का भी आकलन किया। वहीं निदेशक ने मानसून को देखते हुए खदानों और कोयला परिवहन से जुड़ी तैयारियों की भी समीक्षा की। उन्होंने अधिकारियों से कहा कि बारिश के मौसम में भी सुरक्षा के सभी मानकों का पालन करते हुए उत्पादन और कोयला डिस्पैच किसी भी स्थिति में प्रभावित नहीं होना चाहिए। सुरक्षा और कार्यकुशलता दोनों पर समान रूप से ध्यान देने के निर्देश भी दिए।
निरीक्षण के दौरान कोरबा क्षेत्र के वरिष्ठ अधिकारी उनके साथ मौजूद रहे। अधिकारियों ने उन्हें उत्पादन, डिस्पैच, परिचालन व्यवस्था और खदान में चल रहे चल रहे सुधार कार्यों की जानकारी दी।
अंबिका व सराईपाली खदान भी पहुंचे
एसईसीएल के निदेशक तकनीकी रमेश चंद्र महापात्र ने मंगलवार को कोरबा क्षेत्र की अंबिका ओपनकास्ट और सराईपाली ओपनकास्ट खदानों का भी दौरा कर खनन एवं परिचालन गतिविधियों की विस्तृत समीक्षा की।
दौरे के दौरान उन्होंने दोनों खदानों में कोयला उत्पादन, ओवरबर्डन रिमूवल (ओबीआर) तथा कोयला डिस्पैच कार्यों का निरीक्षण किया। निदेशक (तकनीकी) ने आगामी मानसून को देखते हुए खदानों की तैयारियों की भी समीक्षा की। उन्होंने जल निकासी व्यवस्था, पंपिंग इंफ्रास्ट्रक्चर तथा भारी वर्षा के दौरान खनन कार्य निर्बाध रूप से जारी रखने के लिए किए गए अन्य एहतियाती उपायों का निरीक्षण किया। उन्होंने निर्देश दिए कि मानसून के दौरान जलभराव की स्थिति उत्पन्न न हो, इसके लिए सभी व्यवस्थाएं पूरी तरह दुरुस्त रखी जाएं। खदानों में लागू सुरक्षा उपायों की भी समीक्षा की और सुरक्षा मानकों तथा सर्वोत्तम खनन प्रक्रियाओं का कड़ाई से पालन सुनिश्चित करने के निर्देश दिए। उन्होंने कहा कि उत्पादन बढ़ाने के साथ-साथ सुरक्षा सर्वोच्च प्राथमिकता होनी चाहिए।

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